शिक्षा और बच्चो की सवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हिंदी कवितायें Guptratn Hindi Poetry on Children and Education system. hindi_poetry,poem on children, child psychology,
खुद मुझे पुकारेगी मंज़िल ,
गर हौसला बुलंद है,
खुलेंगे दरवाज़े किस्मत के ,
जो अब तलक बंद है ,
तेज़ कर आग तू ये ललक की ,
जो पडी चली अब मंद है ,
खुद तुझे पुकारेगी मंज़िल .........
अभी तू सह दर्द ये सफर का ,
मंज़िल आ जाएँ फिर आनद ही आनंद है ,
मत घबरा अभी "रत्न " तू हार से , देखना खुद ब-खुद हट जाएगी ,
जीत पर पड़ी जो धुंध है ,
खुद तुझे पुकारेगी मंज़िल , गर हौसला बुलंद है
Shrday dhnyawad rachna ko padhne aur sarahana ke liye
Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से बहुत कुछ रोकता है l मत पूछों मुझे क्...
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Shrday dhnyawad rachna ko padhne aur sarahana ke liye