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सोमवार, 23 दिसंबर 2024

मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।

Guptratn bhawnaon ke samndar mein

मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है ,
बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से 
बहुत कुछ रोकता है l 
मत पूछों मुझे क्या -क्या रोकता है ,
गर्म रज़ाई , नरम बिस्तर रोकता है,
ठण्ड में तापमान का ये गिरता हुआ स्तर रोकता है ,
 मत पूछों मुझे-----------
सर्द हवाएं ठण्ड , ये मौसम नम रोकता है ,
थोड़ी देर और सो जाऊं ,ये मन रोकता है। 
जैसे तैसे निकल जाता/जाती  हूँ घर से ,
सड़को पर चाय -पकोड़े की महक, और 
ये बनाने वाला बिन कहे रुकने को टोकता है ,
पीछा छुड़ाके जो चल भी  दूँ आगे में ,
तो निकलने नहीं देता ,
 सड़कों पे लगा ये ट्रैफिक रोकता है 
मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है ,
बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।  

शुक्रवार, 28 जनवरी 2022

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,


Guptratn bhawnaon ke samndar mein

ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,

सर्दी मैं हो जाओ सर्द,
गर्मी मैं हो जाओ गर्मी जैसा ,ll
क्यूँ नहीं तुमको बदलना ,
चाहते क्यों नही तुम संभलना ,
वर्षा आयें तो हो जाओ नम,
बरसो बिलकुल मेघा जैसा ll
बीत गया अब छोड़ो उसको,
बदल जाओ तुम समय के जैसा ll
गर सोचो न मौसम बदले,
तो क्या हम जी पाएंगे,
गर रहे सिर्फ गर्मी या सर्दी ,
तो क्या हम खुश रह पाएंगे l
गर रहे बरसते  मेघा ,
तो क्या न हम बह जायेंगे ,
गर न करवट बदले गर्मी,
तो खेत सूखेंगे,हम प्यासे रह जायेंगे ,
नोतपा जलाकर चला गया,
बारिश भी अब खत्म हुयी ,
आंसू की ऋतू बीत गई ,थोडा कीचड बाकि है,
वो सर्दी मैं मिट जाएंगा ,l
तो जाओ मौसम है खुशियों का ,
उसकी बाँहों मैं तुम आ जाओ,
थोडा उसके झुकने दो,
थोडा सा तुम झुक जाओ ,
खोलो मन के दरवाज़े ,
खुशियों को अन्दर आने दो,
दुःख खड़े है बाहर जाने उनको जाने दो l
कुछ नहीं स्थायी यहाँ पर ,"रत्न"
नही रहने वाला कुछ भी एक जैसा ll
बदल रहा सबकुछ,तुम भी बदलो
थोडा अब मौसम जैसा 
मौसम ही कहता है बन जाओ मेरा जैसा 
बदलो खुदको वक़्त के जैसा ll
©

मंगलवार, 5 अक्टूबर 2021

#guptratn ne देखा है बच्चो को हँसते हुए


 देखा है मैंने बच्चो को हँसते हुए

खिलखिलाते हुए,गुनगुनाते हुए ।

किसी की किताब छीन लेना कभी ,
 किसी की कॉपी को फाड् देना ,
फिर देखा उसे गलती पर मनाते हुए ॥
अपना टिफिन खाकर,दूसरे का छीनना कभी
 भूखे रहकर खुद दोस्तों को खिलाना ,
देखा है मैंने इनको मिल बांटकर खाते हुए ॥
शिकायते करना ,कभी मार देना फिर चिढाना
 देखा उसी दोस्त को टीचर की डांट से बचाते हुए
 झगड़ लेना कभी, फिर कंधे पर हाथ डालकर चलना
 देखा मैंने उनको एक दूसरे को रूठते- मनाते हुए ॥
 फेल हो जाना, कभी परीक्षा न देना
 फिर पूछने पर झूठी कहानी सुनाते हुए ,
"मैंने तो कुछ नहीं किया " पकडे जाने पर कहना,
 देखा है,परीक्षा मैं बच्चो को पूछते और बताते हुए ॥
 डांट खाना कभी फिर चुपके से हँसना देखा है
 मैंने बच्चॊ को शरारत करते हुए, टीचर को मनाते हुए तो कभी सताते हुए ॥
 जाते है कुछ पुराने तो बनते है नए परिवार का हिस्सा ।
 मैंने हर साल देखा बच्चॊ को स्कूल से आते हुए जाते हुए ॥
 गुप्त रत्न
©

सोमवार, 6 सितंबर 2021

गुप्तरत्न ने देखा है, इन बच्चो को बड़े गौर से ,


 

सभी शिक्षकों को समर्पित  एक शिक्षिका की नज़र से 


"
रत्न" ने  देखा है, इन बच्चो को बड़े गौर से ,
छोटे होते है ,पर समझते है दुनिया किसी और दृष्टिकोण से ll

रोज सताते है हमको,रोज चिढ़ाते है हमको,
पर बस आया निश्छल प्रेम नज़र उनमे,देखा जिस ओर से ll

इनमे होता है वो ज़ज्वा की ,बना दे या मिटा दे दुनिया,
चाहे तो मिला दे आसमां को ज़मी के छोर से ll 

अपना कर्तव्य निभाओ बड़ी लगन से तुम गुरुओ,
भविष्य मिला है हमको, संवारना है इसको,सूरज उगाओ तुम भोर से ll

जब लगे ज़रूरत,अधिकार भी तुम जताओ,
कच्ची मिटटी है बनेगे परिपक्व,जब तक जलाओगे भट्टी ये ज़ोर से ll

आधुनिकता की आंधी मैं हम सब बह रहे है,
बचा लो संस्कृति अपनी,मन की भी सुन लो कभी हट के दुनिया के शोर से ll

©

सोमवार, 16 अगस्त 2021

#ये अपना हिन्दुस्तान है।

 "गुप्त रत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "


गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं "

स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य ..


हिन्दू,मुस्लिम,सिख इसाई सब इसकी शान है,
और नहीं कही हम यारो "ये अपना हिन्दुस्तान है।

हाथों मैं रखता कोई गीता,पढता कोई कुरआन है,
और नही कही हम यारो "ये अपना हिन्दुस्तान है "

दुआ भी होती,नात भी सुनते और कहते कव्वाली भी,
और यही पर  सुनते हम भजनों की मधुरम  तान है।।

"शूरवीर महाराणा" यही पर हुए "अकबर महान" है,
और नही कही हम यारो "ये अपना हिन्दुस्तान है।

सियासत भी बोलती है, ज़हर नफरत का घोलती है /
आयें मिटाने इस प्रेम को कई सियासी शैतान है।।

फुट डालकर राज किया कई ,गोरे और देशी हैवान है ,
अब नही करने देंगे ये,यहाँ अपना घर ये  हिन्दुस्तान है।।

हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सब इसकी शान है ,
और नही कही हम यारो "ये अपना हिन्दुस्तान है।।
जय हिन्द।
©

शुक्रवार, 6 अगस्त 2021

#GUPTRATN चलो सुनो शब्दो की महिमा तुम आज ,

 चलो सुनो शब्दो की महिमा तुम आज ,

जाने कितने इन शब्दो मैं छुपे है राज ,

शब्दो से ही है सजते सारे  साज।,

शब्दो से ही है ,सारे राग,

शब्दो ने लिखवायीं रामायण ,

शब्दो  से लंका पा गया विभीषण ,

शब्दो ने करवायी महाभारत ,

इनके बाण न जाएँ अकारथ ,

शब्दो से मिल जाते है ताज ,

शब्दो से जा भी सकती है लाज ,

शब्दो से बन जाते बिगड़े काज ,

शब्द चाहे तो बना दे तुम्हे मोहताज। ......

शनिवार, 24 जुलाई 2021

खुदको भगवान बनाने गुप्तरत्न ने लोगो की मनमानी देखी है

मैने भी लोगो की बईमानी देखी है







मैंने भी लोगो की बेईमानी देखी हैl
खुदको बचाने इनकी दिमागी शैतानी देखी है ।
बैठे है, भविष्य बनाने नन्हे फूलो का,
इन मालियों की,हमने गन्दी बागवानी देखी है ।
सूरज हूँ,छुपेगी चमक बस दो घडी मेरी ,
इसके लिए ग्रहण की इतनी खींचातानी देखी है ।
सच जो छुपता तो,झूठ की पूजा होती, 
खुदको भगवान बनाने,हमने लोगो की मनमानी देखी है।
साबित करना क्या सच को इतना भी यूँ,
झूठ छिपाने,हमने लोगो की चाल सयानी देखी है ॥
शुरू ही हुई न ख़तम अभी तक "गुप्तरत्न"
बिजली बादल की हमने  भी अज़ब कहानी देखी है ॥
©

सोमवार, 28 जून 2021

# पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,

 


 पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,

साथ बैठता था परिवार ,उसमे एक लगाव था ,

भूनकर खाते थे मटर के दाने उसमे,

नही मिला कही वो स्वाद ,उस खाने में एक चाव था ,

अब अलग अलग घर है ,घरों में कमरे भी अलग है ,

है सब अपने , है  साथ , फिर भी सब अलग है ,

रूम हीटर ने ले ली जगह अब कहाँ अलाव जलते है ,

किसने ,किसको कब क्या कहा , दिलों में बस ये घाव पलते है ,

अब कहाँ होती है ,वो सुबह,जहाँ चाय मिलकर सब पीते थे ,

काटते नही ,वक़्त को  लगता है मानो वो जीते थे ,

कहाँ होती है वो सुबह ,

अब तो ओ बस जिम्मेदारियों के तले  दिन ढलते है ,

किसने किसको कब क्या कहाँ ,दिलों में ये ही घाव पलते है .......,

कसूर नही किसी का, कुछ जरूरतें बढ़ी और कुछ लालच भी ,

हो गए आधुनिक ,बन गया  शहर  जो पहले गावं था,

वरना पहले घरों में जलता अलाव था ...............साथ बैठता था परिवार ...



#World Book Day 23 Apri: Books can be good friends and can talk to you. skit by guptratn

मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।

Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से  बहुत कुछ रोकता है l  मत पूछों मुझे क्...

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,