Guptratn bhawnaon ke samndar mein
ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,
सर्दी मैं हो जाओ सर्द,गर्मी मैं हो जाओ गर्मी जैसा ,ll
क्यूँ नहीं तुमको बदलना ,
चाहते क्यों नही तुम संभलना ,
वर्षा आयें तो हो जाओ नम,
बरसो बिलकुल मेघा जैसा ll
बीत गया अब छोड़ो उसको,
बदल जाओ तुम समय के जैसा ll
गर सोचो न मौसम बदले,
तो क्या हम जी पाएंगे,
गर रहे सिर्फ गर्मी या सर्दी ,
तो क्या हम खुश रह पाएंगे l
गर रहे बरसते मेघा ,
तो क्या न हम बह जायेंगे ,
गर न करवट बदले गर्मी,
तो खेत सूखेंगे,हम प्यासे रह जायेंगे ,
नोतपा जलाकर चला गया,
बारिश भी अब खत्म हुयी ,
आंसू की ऋतू बीत गई ,थोडा कीचड बाकि है,
वो सर्दी मैं मिट जाएंगा ,l
तो जाओ मौसम है खुशियों का ,
उसकी बाँहों मैं तुम आ जाओ,
थोडा उसके झुकने दो,
थोडा सा तुम झुक जाओ ,
खोलो मन के दरवाज़े ,
खुशियों को अन्दर आने दो,
दुःख खड़े है बाहर जाने उनको जाने दो l
कुछ नहीं स्थायी यहाँ पर ,"रत्न"
नही रहने वाला कुछ भी एक जैसा ll
बदल रहा सबकुछ,तुम भी बदलो
थोडा अब मौसम जैसा
मौसम ही कहता है बन जाओ मेरा जैसा
बदलो खुदको वक़्त के जैसा ll
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