गुरुवार, 25 जून 2020

#बाल दिवस :गुप्तरत्न बनेगा पेड़ कल घना ,जो पौधा था बचपन में



"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "


कैसे आस लगाएं उत्तरदायित्व की, हम बच्चे से ,
दो काम उन्हें जो कर पाएं ,वो अच्छे से ,
दो कुछ पेड़ लगाने उनको तुम बाग़ में ,
जिनको वो बढ़ता देखें,ऋतू आये जब फाग में ,

कुछ है संगीत विषारद , तो कुछ है अच्छे खेल में,
दो सजाने राग उन्हें तुम,दो अवसर, मत बांधो नियमो की जेल में,
कुछ है बड़े तो कुछ छोटे,कुछ नटखट तो कुछ संजीदा,
दे उनके काम उन्हें तुम कुछ उनके पसंदीदा,
कुछ सबक देती है, हम सबको जीवन की पाठशाला,
जिसको हम सबने जीवन में है ढाला,
वही सबक दो बच्चो को व्यवहार में ,
जिनको करें वो पूरा, और लाएं भी विचार में,

कभी बना दो उनको अध्यापक, कभी सिखाएं वो बच्चो को,
बनने दो तुम नेता उनको ,कम मत समझो मन के सच्चों को,
बीज वो दो तुम संस्कारों का कोमल से इस मन में,

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