शुक्रवार, 28 जनवरी 2022

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,


Guptratn bhawnaon ke samndar mein

ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,

सर्दी मैं हो जाओ सर्द,
गर्मी मैं हो जाओ गर्मी जैसा ,ll
क्यूँ नहीं तुमको बदलना ,
चाहते क्यों नही तुम संभलना ,
वर्षा आयें तो हो जाओ नम,
बरसो बिलकुल मेघा जैसा ll
बीत गया अब छोड़ो उसको,
बदल जाओ तुम समय के जैसा ll
गर सोचो न मौसम बदले,
तो क्या हम जी पाएंगे,
गर रहे सिर्फ गर्मी या सर्दी ,
तो क्या हम खुश रह पाएंगे l
गर रहे बरसते  मेघा ,
तो क्या न हम बह जायेंगे ,
गर न करवट बदले गर्मी,
तो खेत सूखेंगे,हम प्यासे रह जायेंगे ,
नोतपा जलाकर चला गया,
बारिश भी अब खत्म हुयी ,
आंसू की ऋतू बीत गई ,थोडा कीचड बाकि है,
वो सर्दी मैं मिट जाएंगा ,l
तो जाओ मौसम है खुशियों का ,
उसकी बाँहों मैं तुम आ जाओ,
थोडा उसके झुकने दो,
थोडा सा तुम झुक जाओ ,
खोलो मन के दरवाज़े ,
खुशियों को अन्दर आने दो,
दुःख खड़े है बाहर जाने उनको जाने दो l
कुछ नहीं स्थायी यहाँ पर ,"रत्न"
नही रहने वाला कुछ भी एक जैसा ll
बदल रहा सबकुछ,तुम भी बदलो
थोडा अब मौसम जैसा 
मौसम ही कहता है बन जाओ मेरा जैसा 
बदलो खुदको वक़्त के जैसा ll
©

मंगलवार, 5 अक्टूबर 2021

#guptratn ne देखा है बच्चो को हँसते हुए


 देखा है मैंने बच्चो को हँसते हुए

खिलखिलाते हुए,गुनगुनाते हुए ।

किसी की किताब छीन लेना कभी ,
 किसी की कॉपी को फाड् देना ,
फिर देखा उसे गलती पर मनाते हुए ॥
अपना टिफिन खाकर,दूसरे का छीनना कभी
 भूखे रहकर खुद दोस्तों को खिलाना ,
देखा है मैंने इनको मिल बांटकर खाते हुए ॥
शिकायते करना ,कभी मार देना फिर चिढाना
 देखा उसी दोस्त को टीचर की डांट से बचाते हुए
 झगड़ लेना कभी, फिर कंधे पर हाथ डालकर चलना
 देखा मैंने उनको एक दूसरे को रूठते- मनाते हुए ॥
 फेल हो जाना, कभी परीक्षा न देना
 फिर पूछने पर झूठी कहानी सुनाते हुए ,
"मैंने तो कुछ नहीं किया " पकडे जाने पर कहना,
 देखा है,परीक्षा मैं बच्चो को पूछते और बताते हुए ॥
 डांट खाना कभी फिर चुपके से हँसना देखा है
 मैंने बच्चॊ को शरारत करते हुए, टीचर को मनाते हुए तो कभी सताते हुए ॥
 जाते है कुछ पुराने तो बनते है नए परिवार का हिस्सा ।
 मैंने हर साल देखा बच्चॊ को स्कूल से आते हुए जाते हुए ॥
 गुप्त रत्न
©

सोमवार, 6 सितंबर 2021

गुप्तरत्न ने देखा है, इन बच्चो को बड़े गौर से ,


 

सभी शिक्षकों को समर्पित  एक शिक्षिका की नज़र से 


"
रत्न" ने  देखा है, इन बच्चो को बड़े गौर से ,
छोटे होते है ,पर समझते है दुनिया किसी और दृष्टिकोण से ll

रोज सताते है हमको,रोज चिढ़ाते है हमको,
पर बस आया निश्छल प्रेम नज़र उनमे,देखा जिस ओर से ll

इनमे होता है वो ज़ज्वा की ,बना दे या मिटा दे दुनिया,
चाहे तो मिला दे आसमां को ज़मी के छोर से ll 

अपना कर्तव्य निभाओ बड़ी लगन से तुम गुरुओ,
भविष्य मिला है हमको, संवारना है इसको,सूरज उगाओ तुम भोर से ll

जब लगे ज़रूरत,अधिकार भी तुम जताओ,
कच्ची मिटटी है बनेगे परिपक्व,जब तक जलाओगे भट्टी ये ज़ोर से ll

आधुनिकता की आंधी मैं हम सब बह रहे है,
बचा लो संस्कृति अपनी,मन की भी सुन लो कभी हट के दुनिया के शोर से ll

©

#World Book Day 23 Apri: Books can be good friends and can talk to you. skit by guptratn

मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।

Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से  बहुत कुछ रोकता है l  मत पूछों मुझे क्...

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,