
मैंने इन बच्चो को देखा है बड़े गौर से ,
छोटे होते है ,पर समझते है दुनिया किसी और दृष्टिकोण से ll
रोज सताते है हमको,रोज चिढ़ाते है हमको,
पर बस आया निश्छल प्रेम नज़र उनमे,देखा जिस ओर से ll
इनमे होता है वो ज़ज्वा की ,बना दे या मिटा दे दुनिया,
चाहे तो मिला दे आसमां को ज़मी के छोर से ll
अपना कर्तव्य निभाओ बड़ी लगन से तुम गुरुओ,
भविष्य मिला है हमको, संवारना है इसको,सूरज उगाओ तुम भोर से ll
जब लगे ज़रूरत,अधिकार भी तुम जताओ,
कच्ची मिटटी है न बनेगे परिपक्व,जब तक न जलाओगे भट्टी ये ज़ोर से ll
आधुनिकता की आंधी मैं हम सब बह रहे है,
बचा लो संस्कृति अपनी,मन की भी सुनना कभी हट के दुनिया के शोर से ll
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Shrday dhnyawad rachna ko padhne aur sarahana ke liye