गुरुवार, 25 जून 2020

#बाल दिवस :गुप्तरत्न बनेगा पेड़ कल घना ,जो पौधा था बचपन में



"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "


कैसे आस लगाएं उत्तरदायित्व की, हम बच्चे से ,
दो काम उन्हें जो कर पाएं ,वो अच्छे से ,
दो कुछ पेड़ लगाने उनको तुम बाग़ में ,
जिनको वो बढ़ता देखें,ऋतू आये जब फाग में ,

कुछ है संगीत विषारद , तो कुछ है अच्छे खेल में,
दो सजाने राग उन्हें तुम,दो अवसर, मत बांधो नियमो की जेल में,
कुछ है बड़े तो कुछ छोटे,कुछ नटखट तो कुछ संजीदा,
दे उनके काम उन्हें तुम कुछ उनके पसंदीदा,
कुछ सबक देती है, हम सबको जीवन की पाठशाला,
जिसको हम सबने जीवन में है ढाला,
वही सबक दो बच्चो को व्यवहार में ,
जिनको करें वो पूरा, और लाएं भी विचार में,

कभी बना दो उनको अध्यापक, कभी सिखाएं वो बच्चो को,
बनने दो तुम नेता उनको ,कम मत समझो मन के सच्चों को,
बीज वो दो तुम संस्कारों का कोमल से इस मन में,

मंगलवार, 16 जून 2020

#बाल दिवस -दर्द भरी कहानी #गुप्तरत्न की जुबानी

guptratn ki jubani--har student ki dard bhari khani
guptratn.blogspot.com









पुरे साल मैंने क्या किया,
कभी बाजू मैं बैठी लड़की को देखा,
कभी क्लास बंक किया ।

जब होता था revision मेरी होती थी अक्सर तबियत ख़राब,
लगती थी प्यास आती थी वाशरूम की याद,
जब समझती थी टीचर चेप्टर हमने भी खूब उड़ाए पीछे बैठकर कागज़ के हेलीकाप्टर ॥

फ़िक्र किसने की कभी एग्जाम की
पर खबर थी बराबर फेसबुक व्हाट्सप्प और इंस्टाग्राम की ।

खूब समय बिताया हमने टीचर्स को कॉपी करने मैं,
दोस्तों के खेल  में ,हंसी और कभी झगड़ने में ॥

पर वक़्त ने भी गज़ब सितम ढाया ,
बीत गया साल अब फ़ाइनल एग्जाम का वक़्त आया ॥
न अब कोई सहारा न कोई अपना नज़र आया ,
जब सामने question  पेपर मैडम ने थमाया ॥

हमने भी कर लिए हालातो से समझौता ,
बस हल किये प्र्शन दो या एकलौता ॥

अब आयी रिजल्ट की बारी ,
पड़ गयी साल भर की करतुते भारी।

मैडम ने भी दिए भर भर के जीरो ,
असलियत सामने आ गई, बनते थे क्लास में बहुत हीरो ॥

अब आया वो दिन भी अलबेला,
जब लगना था टीचर्स और पेरेंट्स का मेला ॥

दोनों मिले खूब बातें हुई हमारी ,
अब थी बस घर चलने की तैयारी ॥

पहुंचे हम भी घर सर झुकाएं हुए ,
वैसे भी वक़्त काफी बीता थे जुटे चप्पल और गाली खाये हुए ॥

क्या हुई उस दिन घर में बमबारी ,
हम तो बन गए हिरोशिमा ,नागासाकी काम न आयी कोई दोस्ती यारी ॥

हमने भी पकडे अपने कान,
प्रण लिया पढ़ेंगे अब लगाकर जी जान  ॥

पर कमबख्त आदत से थे हम मज़बूर
फिर एक महीने बाद दोस्तों और सोशल मीडिया ने कर दिया हमने पढाई से दूर ॥

बस अब और न रुलायेंगे लिखकर आगे की कहानी ,<br />हर स्टूडेंट की दर्द भरी कहानी गुप्तरत्न की जुबानी ॥

रविवार, 14 जून 2020

#गुप्तरत्न : शिक्षक दिवस विशेष :मैंने इन बच्चो को देखा है बड़े गौर से ,

For current education sys... | Quotes & Writings by Gupt Ratn ...
टीचर'स डे special 

मैंने इन बच्चो को देखा है बड़े गौर से ,
छोटे होते है ,पर समझते है दुनिया किसी और दृष्टिकोण से ll
रोज सताते है हमको,रोज चिढ़ाते है हमको,
पर बस आया निश्छल प्रेम नज़र उनमे,देखा जिस ओर से ll
इनमे होता है वो ज़ज्वा की ,बना दे या मिटा दे दुनिया,
चाहे तो मिला दे आसमां को ज़मी के छोर से ll 
अपना कर्तव्य निभाओ बड़ी लगन से तुम गुरुओ,
भविष्य मिला है हमको, संवारना है इसको,सूरज उगाओ तुम भोर से ll
जब लगे ज़रूरत,अधिकार भी तुम जताओ,
कच्ची मिटटी है न बनेगे परिपक्व,जब तक न जलाओगे भट्टी ये ज़ोर से ll
आधुनिकता की आंधी मैं हम सब बह रहे है,
बचा लो संस्कृति अपनी,मन की भी सुनना कभी हट के दुनिया के शोर से ll

#guptratn शिक्षा में सादगी और विश्वास


"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "

शिक्षा में सादगी और विश्वास

जब तक न होगा  व्यहवहार आपका सादा ,
जब तक न पहुंचोगे ह्रदय द्वार तक ,न खुलेगा विद्यार्थी के मन का दरवाज़ा ॥
होगी न शिक्षा पूरी ,न होगा दायित्व हमारा पूरा ,
रह जाएगी शंकाएं ,रहेगा विश्वास हम पे आधा ॥
बहने दो पानी को खुलकर, न बांधो इसका,
बाल -ह्रदय की उन्मुक्त भावनाएं बहने दो न बनो इनमे बाधा॥
तुम बनो गुरु ऐसे जिसका,ह्रदय सरल हो और बाल मित्र हो ,
थोड़ा डाँटो कभी उनको ,कभी खेलो उनके संग भी ज्यादा ॥
कह दो सारी बातें खेल खेल में ,दे दो मन्त्र सारे पाठों के ,
कभी बनो तुम कृष्णा -सुदामा ,कभी सुनाओ पुराने आदर्शो की गाथा ॥

#World Book Day 23 Apri: Books can be good friends and can talk to you. skit by guptratn

मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।

Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से  बहुत कुछ रोकता है l  मत पूछों मुझे क्...

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,