सोमवार, 28 जून 2021

# पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,

 


 पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,

साथ बैठता था परिवार ,उसमे एक लगाव था ,

भूनकर खाते थे मटर के दाने उसमे,

नही मिला कही वो स्वाद ,उस खाने में एक चाव था ,

अब अलग अलग घर है ,घरों में कमरे भी अलग है ,

है सब अपने , है  साथ , फिर भी सब अलग है ,

रूम हीटर ने ले ली जगह अब कहाँ अलाव जलते है ,

किसने ,किसको कब क्या कहा , दिलों में बस ये घाव पलते है ,

अब कहाँ होती है ,वो सुबह,जहाँ चाय मिलकर सब पीते थे ,

काटते नही ,वक़्त को  लगता है मानो वो जीते थे ,

कहाँ होती है वो सुबह ,

अब तो ओ बस जिम्मेदारियों के तले  दिन ढलते है ,

किसने किसको कब क्या कहाँ ,दिलों में ये ही घाव पलते है .......,

कसूर नही किसी का, कुछ जरूरतें बढ़ी और कुछ लालच भी ,

हो गए आधुनिक ,बन गया  शहर  जो पहले गावं था,

वरना पहले घरों में जलता अलाव था ...............साथ बैठता था परिवार ...



गुरुवार, 25 जून 2020

#बाल दिवस :गुप्तरत्न बनेगा पेड़ कल घना ,जो पौधा था बचपन में



"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "


कैसे आस लगाएं उत्तरदायित्व की, हम बच्चे से ,
दो काम उन्हें जो कर पाएं ,वो अच्छे से ,
दो कुछ पेड़ लगाने उनको तुम बाग़ में ,
जिनको वो बढ़ता देखें,ऋतू आये जब फाग में ,

कुछ है संगीत विषारद , तो कुछ है अच्छे खेल में,
दो सजाने राग उन्हें तुम,दो अवसर, मत बांधो नियमो की जेल में,
कुछ है बड़े तो कुछ छोटे,कुछ नटखट तो कुछ संजीदा,
दे उनके काम उन्हें तुम कुछ उनके पसंदीदा,
कुछ सबक देती है, हम सबको जीवन की पाठशाला,
जिसको हम सबने जीवन में है ढाला,
वही सबक दो बच्चो को व्यवहार में ,
जिनको करें वो पूरा, और लाएं भी विचार में,

कभी बना दो उनको अध्यापक, कभी सिखाएं वो बच्चो को,
बनने दो तुम नेता उनको ,कम मत समझो मन के सच्चों को,
बीज वो दो तुम संस्कारों का कोमल से इस मन में,

मंगलवार, 16 जून 2020

#बाल दिवस -दर्द भरी कहानी #गुप्तरत्न की जुबानी

guptratn ki jubani--har student ki dard bhari khani
guptratn.blogspot.com









पुरे साल मैंने क्या किया,
कभी बाजू मैं बैठी लड़की को देखा,
कभी क्लास बंक किया ।

जब होता था revision मेरी होती थी अक्सर तबियत ख़राब,
लगती थी प्यास आती थी वाशरूम की याद,
जब समझती थी टीचर चेप्टर हमने भी खूब उड़ाए पीछे बैठकर कागज़ के हेलीकाप्टर ॥

फ़िक्र किसने की कभी एग्जाम की
पर खबर थी बराबर फेसबुक व्हाट्सप्प और इंस्टाग्राम की ।

खूब समय बिताया हमने टीचर्स को कॉपी करने मैं,
दोस्तों के खेल  में ,हंसी और कभी झगड़ने में ॥

पर वक़्त ने भी गज़ब सितम ढाया ,
बीत गया साल अब फ़ाइनल एग्जाम का वक़्त आया ॥
न अब कोई सहारा न कोई अपना नज़र आया ,
जब सामने question  पेपर मैडम ने थमाया ॥

हमने भी कर लिए हालातो से समझौता ,
बस हल किये प्र्शन दो या एकलौता ॥

अब आयी रिजल्ट की बारी ,
पड़ गयी साल भर की करतुते भारी।

मैडम ने भी दिए भर भर के जीरो ,
असलियत सामने आ गई, बनते थे क्लास में बहुत हीरो ॥

अब आया वो दिन भी अलबेला,
जब लगना था टीचर्स और पेरेंट्स का मेला ॥

दोनों मिले खूब बातें हुई हमारी ,
अब थी बस घर चलने की तैयारी ॥

पहुंचे हम भी घर सर झुकाएं हुए ,
वैसे भी वक़्त काफी बीता थे जुटे चप्पल और गाली खाये हुए ॥

क्या हुई उस दिन घर में बमबारी ,
हम तो बन गए हिरोशिमा ,नागासाकी काम न आयी कोई दोस्ती यारी ॥

हमने भी पकडे अपने कान,
प्रण लिया पढ़ेंगे अब लगाकर जी जान  ॥

पर कमबख्त आदत से थे हम मज़बूर
फिर एक महीने बाद दोस्तों और सोशल मीडिया ने कर दिया हमने पढाई से दूर ॥

बस अब और न रुलायेंगे लिखकर आगे की कहानी ,<br />हर स्टूडेंट की दर्द भरी कहानी गुप्तरत्न की जुबानी ॥

#World Book Day 23 Apri: Books can be good friends and can talk to you. skit by guptratn

मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।

Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से  बहुत कुछ रोकता है l  मत पूछों मुझे क्...

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,