शनिवार, 24 जुलाई 2021
खुदको भगवान बनाने गुप्तरत्न ने लोगो की मनमानी देखी है
बुधवार, 30 जून 2021
सोमवार, 28 जून 2021
# पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,
पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,
साथ बैठता था परिवार ,उसमे एक लगाव था ,
भूनकर खाते थे मटर के दाने उसमे,
नही मिला कही वो स्वाद ,उस खाने में एक चाव था ,
अब अलग अलग घर है ,घरों में कमरे भी अलग है ,
है सब अपने , है साथ , फिर भी सब अलग है ,
रूम हीटर ने ले ली जगह अब कहाँ अलाव जलते है ,
किसने ,किसको कब क्या कहा , दिलों में बस ये घाव पलते है ,
अब कहाँ होती है ,वो सुबह,जहाँ चाय मिलकर सब पीते थे ,
काटते नही ,वक़्त को लगता है मानो वो जीते थे ,
कहाँ होती है वो सुबह ,
अब तो ओ बस जिम्मेदारियों के तले दिन ढलते है ,
किसने किसको कब क्या कहाँ ,दिलों में ये ही घाव पलते है .......,
कसूर नही किसी का, कुछ जरूरतें बढ़ी और कुछ लालच भी ,
हो गए आधुनिक ,बन गया शहर जो पहले गावं था,
वरना पहले घरों में जलता अलाव था ...............साथ बैठता था परिवार ...
गुरुवार, 25 जून 2020
#बाल दिवस :गुप्तरत्न बनेगा पेड़ कल घना ,जो पौधा था बचपन में
"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "
#World Book Day 23 Apri: Books can be good friends and can talk to you. skit by guptratn
मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।
Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से बहुत कुछ रोकता है l मत पूछों मुझे क्...

