शनिवार, 24 जुलाई 2021

खुदको भगवान बनाने गुप्तरत्न ने लोगो की मनमानी देखी है

मैने भी लोगो की बईमानी देखी है







मैंने भी लोगो की बेईमानी देखी हैl
खुदको बचाने इनकी दिमागी शैतानी देखी है ।
बैठे है, भविष्य बनाने नन्हे फूलो का,
इन मालियों की,हमने गन्दी बागवानी देखी है ।
सूरज हूँ,छुपेगी चमक बस दो घडी मेरी ,
इसके लिए ग्रहण की इतनी खींचातानी देखी है ।
सच जो छुपता तो,झूठ की पूजा होती, 
खुदको भगवान बनाने,हमने लोगो की मनमानी देखी है।
साबित करना क्या सच को इतना भी यूँ,
झूठ छिपाने,हमने लोगो की चाल सयानी देखी है ॥
शुरू ही हुई न ख़तम अभी तक "गुप्तरत्न"
बिजली बादल की हमने  भी अज़ब कहानी देखी है ॥
©

सोमवार, 28 जून 2021

# पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,

 


 पहले घरो के आगंन में जलता अलाव था ,

साथ बैठता था परिवार ,उसमे एक लगाव था ,

भूनकर खाते थे मटर के दाने उसमे,

नही मिला कही वो स्वाद ,उस खाने में एक चाव था ,

अब अलग अलग घर है ,घरों में कमरे भी अलग है ,

है सब अपने , है  साथ , फिर भी सब अलग है ,

रूम हीटर ने ले ली जगह अब कहाँ अलाव जलते है ,

किसने ,किसको कब क्या कहा , दिलों में बस ये घाव पलते है ,

अब कहाँ होती है ,वो सुबह,जहाँ चाय मिलकर सब पीते थे ,

काटते नही ,वक़्त को  लगता है मानो वो जीते थे ,

कहाँ होती है वो सुबह ,

अब तो ओ बस जिम्मेदारियों के तले  दिन ढलते है ,

किसने किसको कब क्या कहाँ ,दिलों में ये ही घाव पलते है .......,

कसूर नही किसी का, कुछ जरूरतें बढ़ी और कुछ लालच भी ,

हो गए आधुनिक ,बन गया  शहर  जो पहले गावं था,

वरना पहले घरों में जलता अलाव था ...............साथ बैठता था परिवार ...



गुरुवार, 25 जून 2020

#बाल दिवस :गुप्तरत्न बनेगा पेड़ कल घना ,जो पौधा था बचपन में



"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "


कैसे आस लगाएं उत्तरदायित्व की, हम बच्चे से ,
दो काम उन्हें जो कर पाएं ,वो अच्छे से ,
दो कुछ पेड़ लगाने उनको तुम बाग़ में ,
जिनको वो बढ़ता देखें,ऋतू आये जब फाग में ,

कुछ है संगीत विषारद , तो कुछ है अच्छे खेल में,
दो सजाने राग उन्हें तुम,दो अवसर, मत बांधो नियमो की जेल में,
कुछ है बड़े तो कुछ छोटे,कुछ नटखट तो कुछ संजीदा,
दे उनके काम उन्हें तुम कुछ उनके पसंदीदा,
कुछ सबक देती है, हम सबको जीवन की पाठशाला,
जिसको हम सबने जीवन में है ढाला,
वही सबक दो बच्चो को व्यवहार में ,
जिनको करें वो पूरा, और लाएं भी विचार में,

कभी बना दो उनको अध्यापक, कभी सिखाएं वो बच्चो को,
बनने दो तुम नेता उनको ,कम मत समझो मन के सच्चों को,
बीज वो दो तुम संस्कारों का कोमल से इस मन में,

#World Book Day 23 Apri: Books can be good friends and can talk to you. skit by guptratn

मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल मगर बहुत कुछ जाने से रोकता है।

Guptratn bhawnaon ke samndar mein मत पूछो मुझे क्या क्या रोकता है , बुलाता है स्कूल /ऑफिस मगर जाने से  बहुत कुछ रोकता है l  मत पूछों मुझे क्...

#गुप्तरत्न ये मौसम कहता है बन जाओ मेरा जैसा,